Friday, November 23, 2018

सेंसर बोर्ड से नाराज गोविंदा, कहा- इंडस्ट्री में माहौल सही नहीं

गोविंदा अपनी अपकमिंग फिल्म रंगीला राजा के प्रमोशन में बिजी हैं. वे मूवी को लेकर केंद्रीय फिल्म बोर्ड प्रमाणन (सीबीएफसी) के रवैये से निराश हैं. सेंसर बोर्ड ने 'रंगीला राजा' में 20 कट लगाने के सुझाव दिए. इस पर गोविंदा का कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री में माहौल सही नहीं है.

फिल्म रिलीज के बारे में पूछे जाने पर गोविंदा ने कहा, "हम मीडिया और दर्शकों को फिल्म की रिलीज की तारीख के बारे में बताएंगे. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि CBFC ने हमारी फिल्म के कुछ दृश्यों को सेंसर किया और इसके कारण हमें फिल्म रिलीज करने के लिए कानूनी रास्ता लेना पड़ा".


गोविंदा का कहना है कि इस तरह का माहौल फिल्म जगत के लिए अच्छा नहीं है. उन्होंने कहा, "मुझे फिल्म में कोई विवादास्पद दृश्य नहीं दिखे. मुझे लगता है कि इसकी रिलीज जानबूझकर रोकी जा रही है. फिल्म उद्योग में अच्छा माहौल नहीं है. मैंने पहलाज निहलानी की फिल्म से अपना करियर शुरू किया था. इसलिए मुझे उम्मीद है कि यह फिल्म बिना मुश्किलों के रिलीज होगी"

बता दें, CBFC के फैसले का विरोध करते हुए फिल्म निर्माता पहलाज निहलानी ने इस महीने की शुरुआत में याचिका दायर की थी. जिसमें कहा था कि सुझाव अन्यायपूर्ण और अनिश्चित हैं क्योंकि वह दृढ़ता से मानते हैं कि फिल्म किसी भी तरह से अश्लील नहीं है.

पाकिस्तान के कराची में मौजूद चीनी काउंसलेट के बाहर शुक्रवार सुबह आतंकी हमला (Karachi Attack) हुआ है. यहां कुछ हमलावरों ने बम धमाका किया और फायरिंग की. इस मुठभेड़ में पाकिस्तान पुलिस के दो सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई है, जबकि 3 हमलावरों को भी मार गिराया गया है. मारे गए आतंकी के पास से सुसाइड जैकेट और हथियार बरामद हुए हैं. चीनी काउंसलेट पर हुए इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली है.

जिस चीनी काउंसलेट पर हमला हुआ है उससे 150 मीटर की दूरी पर ही अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का घर है. ये धमाका भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे (9.30 PAK समयानुसार) हुआ. धमाके के बाद से ही फायरिंग भी हो रही है. फायरिंग दोनों ही तरफ से हो रही है. इस हादसे में अभी तक 3 लोगों के जख्मी होने की खबर है. इस इलाके को रेड जोन कहा जाता है

Tuesday, November 6, 2018

कर्नाटक उपचुनाव में बीजेपी की हार के मायने क्या

कर्नाटक उप-चुनावों में कांग्रेस-जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) को मिली जीत जहां इस गठबंधन के लिए कई मायनों में ख़ास है, वहीं पांच सीटों में से चार सीटें जीतकर पार्टी ने बीजेपी विरोधी दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों को ये साफ़ संदेश भी दे दिया है कि एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को हराना संभव है.

जेडीएस के साथ गठबंधन पर कांग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति समझ आती है. मई में विधानसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस ने जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद देने का वादा किया और हाथ मिलाया.

ये साझेदारी काम भी कर गई और पांच सीटों पर हुए उप-चुनावों में से सिर्फ़ एक सीट ही बीजेपी के हक़ में गई है. बीजेपी ने सिर्फ़ शिवमोगा लोकसभा सीट पर जीत हासिल की है.

लेकिन, ये चुनावी नतीजे ये भी दिखाते हैं कि जिस तरह से बीजेपी में गुटबाज़ी चल रही है, इससे बीजेपी के जमखंदी निर्वाचन क्षेत्र में जीतने की उम्मीद भी ख़त्म हो सकती है जहां लिंगायत प्रमुख और प्रभावशाली समुदाय है.

कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने लोकसभा की मंड्या सीट (जेडीएस) और बल्लारी (एसटी) (कांग्रेस) पर जीत हासिल की है और विधानसभा सीटों की बात करें तो रामानागरम (जेडीएस) और जमखंडी पर भी गठबंधन ने जीत दर्ज की है.

येदियुरप्पा के बेटे और बीजेपी के बीवाई राघवेंद्र अकेले ऐसे बीजेपी उम्मीदवार हैं, जिन्होंने जीत दर्ज की है. शिवमोगा सीट पर उन्होंने जेडीएस के उम्मीदवार मधु बंगरप्पा को क़रीब 52 हज़ार मतों से मात दी.

कांग्रेस भी अचरज में
लेकिन बीजेपी के गढ़ बल्लारी में कांग्रेस के प्रतिनिधि का बीजेपी के उम्मीदवार को करीब पौने तीन लाख वोटों से हराना किसी अचंभे से कम नहीं है. ख़ुद कांग्रेस भी इस जीत पर आश्चर्यचकित है.

राजनीति विशेषज्ञ और जैन यूनिवर्सिटी के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. संदीप शास्त्री ने बीबीसी से कहा, "कर्नाटक चुनावों के नतीजे अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण संदेश लिए हुए हैं. जहां कांग्रेस ने एक क्षेत्रीय पार्टी के साथ गठबंधन किया. ये गठबंधन, राष्ट्रीय पार्टियों के लिए एक सीख है कि अगर आप साथ नहीं आए और क्षेत्रीय स्तर की पार्टियों से गठबंधन बनाकर काम नहीं किया तो, भविष्य कमज़ोर ही होगा."

आउटलुक के पूर्व संपादक कृष्णा प्रसाद कहते हैं, "कांग्रेस और जेडीएस दोनों ही पार्टियों के इस गठबंधन में तालमल की कमी थी लेकिन कर्नाटक चुनावों में बल्लारी में कांग्रेस की ये जीत निश्चित तौर पर उनके गठबंधन को मज़बूती देने का काम करेगी. बीजेपी के गढ़ में कांग्रेस की जीत ये भी साबित करती है कि मोदी-शाह की जोड़ी को हराना नामुमकिन तो नहीं है. भले ही कोई केंद्रीय भूमिका में हो या न हो लेकिन अगर गणित सही बैठ गया तो उन्हें हराया जा सकता है."

डॉ शास्त्री कहते हैं, "कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन की केमिस्ट्री अब नज़र आ रही है. दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच ज़मीनी स्तर पर मतभेद हो सकते हैं लेकिन ये चुनावी नतीजे निश्चित तौर पर उनके बीच के मतभेदों को दूर करने में मदद करेंगे. साथ ही बीजेपी के भीतर की गुटबाज़ी का नतीजा भी सामने है. येदियुरप्पा के निर्वाचन क्षेत्र को छोड़ दें तो किसी ने भी जीत दर्ज नहीं की है और ये पूरी तरह गुटबाज़ी का परिणाम है."

इसलिए लोग कहते हैं देश हो तो सिंगापुर जैसा

उत्तरी सिंगापुर के ख़ातिब में लगभग 200 वॉलन्टियर एक हाउसिंग एस्टेट में कचरा तलाश रहे थे. उनमें बच्चे सहित कुछ परिवार और एक स्थानीय अस्पताल का व्यक्ति था.

"नॉर्थ वेस्ट ब्रिस्क वॉकिंग क्लब" के कुछ सदस्य भी वहां थे, जो एक जैसी टी-शर्ट पहने हुए थे. उनमें से कई बुज़ुर्ग थे.

कुछ लोगों ने झाड़ियों में सिगरेट के बट खोजे. कुछ ने टेबल के ऊपर छोड़े गए टिशू पेपर उठाए.

ईमानदारी से कहूं तो इसे स्वच्छता दिवस कहना असंगत लग रहा था. सब पहले से ही साफ़ था. किसी भी वॉलन्टियर का बोरा भरकर नहीं आया.

सिंगापुर में इसकी ही उम्मीद की जाती है. इस देश में साफ़-सफ़ाई को लेकर लंबे समय से जुनून रहा है.

अक्टूबर 2018 में सिंगापुर ने मील का पत्थर पार किया. इसके संस्थापक और पहले प्रधानमंत्री ली कुआन यू ने 50 साल पहले इसी महीने "कीप सिंगापुर क्लीन कैंपेन" शुरू किया था.

सिंगापुर में सफ़ाई अभियान पहले से ही चल रहा था, लेकिन ली का कैंपेन अलग था. इसमें सिंगापुर सरकार ने पहली बार सामाजिक नियंत्रण के तरीक़े के रूप में जुर्माने का प्रयोग किया.

सिंगापुर की आर्थिक तरक़्क़ी को इस कैंपेन की शुरुआती सफलता में रोड़ा समझा गया. किसी भी पैमाने पर सिंगापुर आज साफ़ है, लेकिन उन वजहों से नहीं जो आपके ज़हन में आती हैं.

साफ़ और हराभरा
यदि आप सिंगापुर में कचरे से भरे किसी ट्रक के पीछे-पीछे चलें तो आप तुरंत समझ जाएंगे कि इस शहर को लगातार क्यों साफ़ किया जाता है. कचरा गाड़ी की गंध आपको झटका लगाती है.

ठंडे जलवायु वाले शहरों में घरों का कचरा उठाने में थोड़ा अंतराल भी हो जाए तो चल जाता है. गर्म, आर्द्र, ऊष्णकटिबंधीय शहरों में तुरंत सफ़ाई करनी पड़ती है. घरेलू और व्यावसायिक कचरे का जमा होना बहुत ही ख़तरनाक हो सकता है.

पब्लिक हाइज़ीन काउंसिल के चेयरमैन एडवर्ड डिसिल्वा कहते हैं, "दूसरे देशों की तरह यहां कूड़े कर्कट का ढेर हो तो चूहे, मक्खियां और तिलचट्टे पैदा हो सकते हैं. ये सब बैक्टीरिया और रोगाणुओं के वाहक हैं."

मच्छरों का ख़तरा इनसे भी बड़ा है. सिंगापुर में मलेरिया नहीं होता, लेकिन बुरे साल में डेंगू के दसियों हज़ार मामले होंगे.

गंदगी से सफ़ाई की ओर
ली कुआन यू ने जब क्लीन एंड ग्रीन पॉलिसी लागू की तब उनके लक्ष्य बड़े थे.

यह उस बड़ी योजना का हिस्सा था जिसमें स्वास्थ्य क़ानूनों में परिवर्तन, रेहड़ पट्टी के दुकानदारों का हॉकर केंद्रों में स्थानांतरण, सीवेज़ सिस्टम का विकास और बीमारियों के नियंत्रण के उपाय शामिल थे.

इसी समय लोग कैम्पॉन्ग (लकड़ी की झोपड़ियों वाले मलय-शैली के गांव) से निकलकर बेहतर बुनियादी सुविधाओं वाले हाउसिंग एस्टेट में रहने लगे.

1968 में ली ने कहा था, "हमने निर्माण किया है, हमने प्रगति की है. लेकिन दक्षिण एशिया के सबसे साफ़ और हरित शहर के रूप में हमारी पोज़िशन से बढ़कर इस सफलता का कोई दूसरा हॉलमार्क नहीं है."

विज्ञापनों के अलावा सार्वजनिक शिक्षा के आयोजन कराए जाते थे. स्वास्थ्य अधिकारियों के व्याख्यान होते थे और सरकार मौक़े पर मुआयना करती थी.

ऐसी प्रतियोगिताएं भी थीं जिनमें सबसे साफ़ और सबसे गंदे दफ्तरों, दुकानों, फ़ैक्टरियों, सरकारी इमारतों, स्कूलों और सार्वजनिक वाहनों की पहचान होती थी.

Monday, November 5, 2018

从德克萨斯州参议员之争 看美国政治生态变化

德克萨斯州参议员之争是美国中期选举中最受瞩目的一战。选举前的周末,两党的竞选团队出尽浑身解数作最后冲刺。由于德克萨斯州近年的人口组成变化符合美国未来三十年的趋势,它又被誉为"美国的未来"。透过德克萨斯州的选战,可以一窥美国政治风向的微妙变化。

中期选举前的周六,71岁的卡洛琳(Carolyn Attra-Nasas)盛装打扮,特意穿上了鲜红色的外套,那是她支持的共和党的颜色。"我很担忧这次的选举。我要站出来守护美国的价值!"卡洛琳对BBC中文说。她早早地来到德克萨斯州休斯顿一家美式餐馆,不是为了用餐,而是引颈等候她心仪的候选人出席一场面向共和党女性选民的拉票活动。她跟数十个年纪相仿的同伴站在一起,手上抓着助选标语牌,还往上衣上贴了好几个贴纸,上面都写着同一个名字:克鲁兹(Ted Cruz)。这是两年前曾竞选美国总统、如今正谋求连任的该州参议员。

几英里外的休斯顿南部,61岁的特蕾莎(Teresa)也没在周六闲下来,她正忙着接待鱼贯而入的助选志愿者。特蕾莎在28年前从英国移居美国,在六个月前决定加入美国国籍。"我从未如此强烈的感觉到,这个国家正往危险的方向进发。我考虑了很久,决定成为有投票权的公民。投一票还不够,我还要为这次选举做更多工作。"特蕾莎和志愿者们走访休斯顿各区敲门扫街,动员选民在11月7日选举日投票,分发着供选民插在寓所草坪上的助选标语。只要在休斯顿市区内开车转上五分钟,你准能看见好几个同款的黑白标语,上面有四个醒目的英文字母:BETO。人称贝托的民主党人奥洛克(Beto O'Rourke)是德克萨斯州众议员,正在与克鲁兹争夺州参议员的席位。

两人支持率之接近,也让人感到意外。一向被认为是深红州的德克萨斯州自1988年起,就没有选出过民主党籍的参议员。上世纪90年代起的总统选举中,共和党人在德克萨斯都以超过两位数百分比的得票率差距击败民主党人。特朗普是唯一的意外,他在这里的得票率只比希拉里高出了9%,这让民主党看到了人口大州德克萨斯成为关键摇摆州的潜质。

而一年前还名不见经传的奥洛克,借由草根竞选活动,在德克萨斯州乃至全美掀起了一股来势汹涌的蓝色浪潮。最新民调显示,奥洛克目前落后克鲁兹3到8个百分点,差距曾小至1个百分点。奥洛克要在选举中一举爆冷,并非毫无可能。